डेब्ट टू इक्विटी क्या होता है? Debt To Equity Kya Hota Hai

शेयर बाजार में स्टॉक खरीदते समय जिन अनुपातों का विश्लेषण किया जाता है, उसमें से डेट टू इक्विटी की जानकारी इस आर्टिकल में लिखी गई है, इस आर्टिकल में बताया गया है कि डेब्ट टू इक्विटी क्या होता है? (Debt To Equity Kya Hota Hai) इसकी गणना कैसे करें और इससे शेयर धारक को कोनसा लाभ होगा।

डेब्ट टू इक्विटी क्या होता है? Debt To Equity Kya Hota Hai

बढ़ती हुई कंपनियों को देखकर हमें लगता है कि कंपनी अच्छा मुनाफा कमा रही होगी, तभी तो इतनी ग्रोथ हो रही है, लेकिन कंपनी का मुनाफा सभी कंपनियों की ग्रोथ का कारण नहीं हो सकता। क्या पता अगर किसी कंपनी ने लोन लेकर अपना कारोबार बढ़ाया हो तो लोगों को कंपनी के लोन के बारे में कैसे पता चलेगा? कंपनी ने लोन लिया है या नहीं। यही काम डेब्ट टू इक्विटी करता है।

डेट टू इक्विटी एक अनुपात है जिसकी मदद से पता चलता है कि कंपनी पर कितना प्रतिशत लोन है। किसी भी कंपनी का डेट टू इक्विटी रेशियो 1 से नीचे होना चाहिए और अगर किसी कंपनी का डेट टू इक्विटी रेशियो 1 से ऊपर है तो उस कंपनी पर ज्यादा कर्ज होता है जिसके कारण उस कंपनी के शेयर कभी भी गिर सकते हैं।

किसी भी कंपनी का डेबट् टू इक्विटी निकालना बहुत आसान है। डेबट् से इक्विटी की गणना करने के लिए, आपको कुल इक्विटी को कंपनी पर मौजूद ऋण से विभाजित करना होगा, जिससे उस कंपनी के debt to equity की गणना होगी।

किसी कंपनी के शेयर खरीदते समय लोगों को डेट टू इक्विटी का लाभ मिलता है। लोग ऐसी कंपनी के शेयर खरीदना पसंद नहीं करते, जिस कंपनी का डेट टू इक्विटी ज्यादा हो। क्योंकि उन्हें लगता है कि कंपनी पर ज्यादा कर्ज होने से कंपनी डूब सकती है।

Conclusion

कंपनी पर वर्तमान में कितने प्रतिशत कर्ज उपलब्ध है जिसके कारण कंपनियां अपना कारोबार बढ़ा रही हैं? वह अनुपात जो मौजूदा कर्जा को दर्शाता है उसे debt to equity कहा जाता है।

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